
दुर्लभ कश्यप
क्राइम करने के लिए देता था विज्ञापन
दुर्लभ कश्यप की पूरी जानकारी
1. व्यक्तिगत जानकारी:
- पूरा नाम: दुर्लभ कश्यप
- जन्म: 8 नवंबर 2000, उज्जैन, मध्य प्रदेश
- पिता: मनोज कश्यप – कारोबारी
- मां: पद्मा कश्यप – उज्जैन के क्षीरसागर इलाके में सरकारी स्कूल की पूर्व टीचर
- निवास: जीवाजीगंज, उज्जैन
- उम्र: मौत के समय सिर्फ 20 साल (2020)
2. पहचान और स्टाइल:
यही वजह थी कि वो युवाओं में फेमस हो गया था।
- माथे पर बड़ा लाल टीका / तिलक
- आँखों में काजल / सुरमा
- काले कपड़े और कंधे पर हमेशा काला गमछा
- बिल्लियों से बहुत प्यार करता था, अक्सर कंधे पर बिल्ली रखता था
- खुद को महाकाल का भक्त बताता था
3. अपराध की दुनिया में एंट्री:
- जब बच्चे 10वीं-12वीं की तैयारी करते हैं, दुर्लभ ने 16 साल की उम्र में “2222 गैंग” बनाई।
- गैंग में ज्यादातर 15-19 साल के नाबालिग लड़के भर्ती करता था।
- छोटी चोरी, मारपीट से शुरू करके धीरे-धीरे हत्या, लूट, वसूली और जमीन के विवादों में इंटरफेयर करने लगा।
- उज्जैन पुलिस के लिए वो सिरदर्द बन गया था, 2 साल में ही पूरे शहर में उसका नाम चलने लगा।
4. सोशल मीडिया गैंगस्टर:
दुर्लभ शायद भारत का पहला ऐसा गैंगस्टर था जिसने Facebook को क्राइम के विज्ञापन के लिए इस्तेमाल किया।
- प्रोफाइल पर लिखा था: “नामी बदमाश, कुख्यात अपराधी, हत्यारा। किसी भी विवाद के निपटारे के लिए संपर्क करें।”
- हथियारों के साथ फोटो, वीडियो डालकर दहशत फैलाता था।
- सोशल मीडिया पर ही दूसरी गैंग को धमकी देता था।
- उसके स्टाइल की वजह से Instagram और Facebook पर हजारों फॉलोअर बन गए थे।
5. केस और गिरफ्तारी:
- 18 साल की उम्र तक उस पर 9 से ज्यादा गंभीर केस – हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, आर्म्स एक्ट, वसूली।
- अक्टूबर 2018 में पुलिस ने उसे 23 साथियों के साथ गिरफ्तार किया था।
- तब एक पुलिस अफसर ने उसे कहा था – “तूने बहुत कम उम्र में बहुत दुश्मनी पाल ली है, जेल में ही सुरक्षित रहेगा।”
- कोरोना काल में 2020 में पैरोल पर जेल से बाहर आया था।
6. मौत – 6 सितंबर 2020:
- रात को घर पर खाना खाकर दोस्तों के साथ हेलावाड़ी / सुयोग नगर में सिगरेट लेने दुकान पर गया।
- वहां पहले से ही दुश्मन गैंग KKC (शहनवाज और अमन) मौजूद थी।
- दोनों गैंग में पुरानी रंजिश थी, बहस हुई और झगड़ा हो गया।
- दुर्लभ ने गोली चलाई जो शहनवाज के कंधे पर लगी।
- जवाब में शहनवाज गैंग ने चाकू और तलवार से हमला कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसे 34 बार चाकू मारा गया था।
- मौके पर ही मौत हो गई।
7. मौत के बाद:
उसकी मौत के बाद उज्जैन पुलिस ने उसकी गैंग के कई सदस्यों को पकड़ा। आज भी TikTok, Instagram पर उसके नाम से कई फैन पेज हैं जो उसे “उज्जैन का डॉन” बताते हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि जमीन पर उसकी गैंग पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
ये कहानी बताती है कि कम उम्र में गलत रास्ते पर जाने का अंजाम क्या होता है – नाम तो मिलता है पर जिंदगी बहुत छोटी रह जाती है।
अनिल कुमार गॉड पिछले 15 वर्षों से हिंदी भाषी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. गॉड.की राजनीतिक, अपराध और सामाजिक खबरों पर अच्छी पकड़ है. विभिन्न संस्थानों में रहते हुए कई बार उनके काम का असर भी देखने को मिला. डिजिटल पत्रकारिता की तरफ रुख किया. वर्तमान मै TNI . अनिल कुमार गॉड ने CCS यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. घूमना, रिपोर्टिंग करना उनका शौंक है
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