रिपोर्ट के मुताबिक़, हिमालय-काराकोरम क्षेत्र में करीब 40,000 ग्लेशियर होने का अनुमान है. लेकिन इनमें से केवल 21 ग्लेशियरों की लगातार और विस्तार से निगरानी की जा रही है.
निगरानी में ये कमी इसलिए मायने रखती है, क्योंकि पहाड़ों का प्राकृतिक रूप बहुत तेज़ी से बदल रहा है.
ग्लेशियर पिघलकर पीछे हटते हैं, तो उनकी जगह झीलें बन सकती हैं, जो धीरे-धीरे बड़ी होती जाती हैं. इन झीलों का पानी चट्टानों और बर्फ़ के ऐसे ढेर से रुका होता है, जो मज़बूत नहीं होते.


