पेरिस में जो कुछ हुआ, उसके कारण उस संप्रदाय पर ‘महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव’ के आरोप लगे और विरोध प्रदर्शन हुए.
हालांकि, स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायियों द्वारा महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर वर्षों से विवाद रहा है.
प्रख्यात पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता सलिल त्रिपाठी ने गुजरातियों पर लिखी अपनी पुस्तक में यहाँ तक लिखा है, “स्वामीनारायण संप्रदाय की सीमाएँ ही गुजरात की सीमाएँ हैं. उन्होंने अपनी सीमाएँ स्वयं निर्धारित कर ली हैं. इस संप्रदाय में महिलाओं पर लगाए गए अत्यंत कठोर प्रतिबंध उन सीमाओं को लागू करने का एक और तरीक़ा है.”
हालांकि, स्वामीनारायण संप्रदाय पर आरोप है कि उनका न केवल महिलाओं के ख़िलाफ़, बल्कि दलितों के ख़िलाफ़ भी भेदभाव का एक इतिहास रहा है.


