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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराना एक बड़ा प्रशासनिक और भ्रष्टाचार का मामला दोबारा खुल गया है।

October 4, 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराना एक बड़ा प्रशासनिक और भ्रष्टाचार का मामला दोबारा खुल गया है। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक गबन के गंभीर आरोपों पर विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं।

यह पूरा मामला साल 2006 का है, जब 1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार केरल सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के रूप में तैनात थे।

‘मलयानकीझु वेणुगोपाल’ की ओर से दर्ज कराई गई एक नई शिकायत के बाद केरल सरकार ने यह कदम उठाया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2006 में PWD सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार ने केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत सड़क निर्माण के ठेके देने में भारी वित्तीय गड़बड़ियों और आपराधिक कदाचार किया था।
विवाद बढ़ने के बाद 2006 के अंत से पहले ही ज्ञानेश कुमार को PWD सचिव के पद से हटाकर ट्रांसफर कर दिया गया था। उस समय भी एक शुरुआती जांच हुई थी, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुरानी जांच को बिना किसी तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाए दबाव में बंद कर दिया गया था।

यह मामला केवल वित्तीय हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक विदेशी नागरिक की संदिग्ध खुदकुशी से भी जुड़ा हुआ है।

केरल सड़क परियोजना (KSTP) में ‘PATI-BEL’ नाम के भारत-मलेशिया की संयुक्त कंपनी काम कर रही थी। इस कंपनी के मेन प्रोजेक्ट मैनेजर और मलेशियन नागरिक ली सी बीन ने 2006 में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी।
मीडिया और तत्कालीन रिपोर्टों के अनुसार, ली सी बीन के सुसाइड नोट में तत्कालीन PWD सचिव ज्ञानेश कुमार और PWD के अन्य शीर्ष अधिकारियों का नाम दर्ज था। नोट में आरोप लगाया गया था कि भारतीय अधिकारियों द्वारा उन्हें भारी भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
केरल के गृह विभाग ने 2006 में मलेशियन मैनेजर की खुदकुशी और PWD प्रोजेक्ट्स की फाइलें विजिलेंस डिपार्टमेंट से दोबारा तलब की हैं।
विजिलेंस विभाग अब इस बात की नए सिरे से जांच करेगा कि क्या 2006 की शुरुआती जांच को गलत तरीके से बंद किया गया था और क्या ली सी बीन के सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने इस मामले का दोबारा सामने आना इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव आयोग की तरफ से चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) और चुनाव आयोग के भीतर दो अन्य चुनाव आयुक्तों (संधू और जोशी) के साथ जारी मतभेदों को लेकर वे पहले से ही विपक्ष और कई राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं।

REPORT TNI

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