मदर ऑफ डेमोक्रेसी” यानी “लोकतंत्र की जननी” भी कहते आए. लेकिन बीते कल की तस्वीरों ने देश की असल हकीकत बयान की है.

न्यूयॉर्क टाइम्स में भारत के सबसे बड़े लोकतंत्र की तस्वीर है, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी मंचों से ना जाने कीतीं बार भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” यानी “लोकतंत्र की जननी” भी कहते आए. लेकिन बीते कल की तस्वीरों ने देश की असल हकीकत बयान की है.
दरअसल, विदेशी मीडिया भी दिल्ली प्रोटेस्ट की मिनट दर मिनट रिपोर्टिंग कर रहा है. किसी ने इसे युवा आंदोलन का सीजन-2 कहा है. तो कुछ इसे कॉकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर भी देख रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय अखबारों और न्यूज़ मीडिया आउटलेट्स पर अगर आप सरसरी नज़र दौड़ाएं तो अलज़जीरा की नज़र से फिलहाल दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात हैं. वहीं और एजेंसीज़ ने दिल्ली प्रोटेस्ट को नरेंद्र मोदी के लिए नई चुनौती माना है.
‘सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की तुलना में सुरक्षाकर्मियों की संख्या ज़्यादा. नई दिल्ली एक किले में तब्दील.’ इस तरह की हेडलाइन और बारीक बातों की तरफ इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसीज ने ध्यान दिलाया है. सैकड़ों प्रदर्शनकारी नज़रबंद, अभिजीज दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास, ध्रुव राठी, से लेकर और कई नाम हिरासत में. ये तो कमोबेश सभी जगह है ही. इसके अलावा भी और बहुत कुछ विदेशी मीडिया में ऐसा छपा है जिस पर आपकी निग़ाह जानी चाहिए.
सबसे पहले अलजज़ीरा की बात. कतर की मीडिया संस्थान अलजज़ीरा पर सीजेपी प्रोटेस्ट की मिनट दर मिनट रिपोर्टिंग हो रही है. इसके लिए उन्होंने एक लाइव पन्ना चला रखा है. इसमें दिल्ली की कुछ तस्वीरों को पब्लिश किया है. हेडलाइन लगाया है, New Delhi in lockdown as police crack down on protesters. मतलब, प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई के बीच नई दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात.
अलजज़ीरा ने लिखा कि सेंट्रल दिल्ली में हालात काफी अफरा-तफरी वाले हैं. प्रदर्शनकारियों की तुलना में सुरक्षाकर्मी ज़्यादा संख्या में मौजूद हैं. प्रदर्शनकारी छोटे-छोटे समूहों में आ रहे हैं और पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बसों में ले जा रही है. अलजज़ीरा का दावा है कि ऐसे भी कुछ लोग प्रोटेस्ट साइट पर हैं, जो मीडिया से बात करने वाले प्रदर्शनकारी को टोकते या परेशान करते दिख रहे हैं.
दुनिया की सबसे पुरानी इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी में से एक रॉयटर्स ने सीजेपी प्रोटेस्ट पर हेडलाइन लगाई है – India detains youth protest leader to defuse rally against election chief. उन्होंने सीजेपी प्रोटेस्ट को ‘नरेंद्र मोदी के लिए नई चुनौती’ कहा है.
रॉयटर्स आगे लिखता है, ‘सीजेपी का ये प्रदर्शन भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पिछले हफ़्ते शुरू हुए विरोध की कड़ी में सबसे बड़ा है. वोटर लिस्ट में बदलावों के कारण भारत में अब तक करीब 13 करोड़ लोग वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं. ये संख्या जापान की आबादी से भी अधिक है. विपक्षी पार्टियों या फिर संगठनों की तरफ से हो रहे रोज़ाना के विरोध प्रदर्शन मोदी के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती पेश हो रहे हैं.’
अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स भी अपने मेन पेज पर इसकी रिपोर्टिंग कर रहा है. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, India’s young are putting their bodies on the line to be heard. मतलब भारत की नौजवान आबादी अपनी बात मनवाने के लिए जोखिम उठाने से भी गुरेज़ नहीं कर रही है. एनवाईटी लिखता है,
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस बार के विरोध प्रदर्शन में सरकार और प्रशासन की तरफ से की गई तैयारियों को देखकर 2020 को याद किया है. जब तीन नए कृषि कानूनों से नाराज़ किसान समूहों ने नई दिल्ली की ओर कूच करने की कोशिश की थी. तब उन्हें दिल्ली के बॉर्डर पर रोक दिया गया था. जहां वो महीनों तक टेंट लगाकर वहीं डटे रहे थे.
अनिल कुमार गॉड पिछले 12 वर्षों से हिंदी भाषी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. गॉड.की राजनीतिक, अपराध और सामाजिक खबरों पर अच्छी पकड़ है. विभिन्न संस्थानों में रहते हुए कई बार उनके काम का असर भी देखने को मिला. डिजिटल पत्रकारिता की तरफ रुख किया. वर्तमान मै TNI . अनिल कुमार गॉड ने CCS यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. घूमना, रिपोर्टिंग करना उनका शौंक है
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