
द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की 6 अक्टूबर 2026 की जाँच रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में SIR के शुरुआती चरण में जोड़े गए 16.18 लाख मतदाताओं के नाम और उनके आवेदनों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट में इसे कानून के प्रावधानों के उल्लंघन और चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल के तौर पर उठाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कानून के तहत चुनाव आयोग को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर दावे और आपत्तियों की सूची सार्वजनिक करनी होती है। इसमें प्रत्येक आवेदन फॉर्म तक की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश के CEO की वेबसाइट पर 16.18 लाख मतदाताओं के नाम जोड़ने के आवेदनों की सूची और उनका विवरण मौजूद नहीं है।
जाँच में उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए दाखिल किए गए आवेदनों और अंतिम सूची में जोड़े गए मतदाताओं के आंकड़ों की तुलना की गई। उत्तर प्रदेश के CEO की ओर से 403 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 71.38 लाख Form 6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया गया था। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की बताई गई है, जिनके नाम SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
इसके मुकाबले अंतिम मतदाता सूची में 84.30 लाख नए मतदाता जोड़े गए। यानी सार्वजनिक किए गए 71.38 लाख आवेदनों से 12.92 लाख अधिक मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल किया गया।
इसी अंतर को समझने के लिए SIR से जुड़े उत्तर प्रदेश CEO के आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्तियों की पड़ताल की गई। इसमें 7 मार्च की एक प्रेस विज्ञप्ति सामने आई, जिसमें बताया गया था कि ड्राफ्ट सूची तैयार होने से पहले ही 16.18 लाख लोगों ने Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था।
लेकिन इन 16.18 लाख आवेदनों के नाम और जरूरी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए। ऐसे में यह पता लगाना संभव नहीं है कि ये मतदाता किन विधानसभा क्षेत्रों और किन मतदान केंद्रों में जोड़े गए और उनकी पात्रता का सत्यापन किस तरह किया गया।
SIR के तहत ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद ही लोगों को पता चला कि उनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट होने के आधार पर हटाए गए हैं। ऐसे में ड्राफ्ट सूची से पहले दाखिल किए गए 16.18 लाख Form 6 आवेदनों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से जवाब मांगा गया। रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, “हम आपकी शंकाओं या सवालों को सुलझाने के लिए कंसल्टेंसी सेवाएं नहीं देते।” इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। प्रकाशन से पहले CEO और दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को विस्तृत सवाल भी भेजे गए थे, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर 16.18 लाख प्री-ड्राफ्ट मतदाताओं को वैध मान लिया जाए, तब भी उत्तर प्रदेश में SIR के आंकड़ों से जुड़ा एक और बड़ा अंतर सामने आता है।
आंकड़ों को मिलाने के लिए यह मानना पड़ेगा कि ड्राफ्ट सूची से हटाए गए और दोबारा नाम जोड़ने के लिए आवेदन करने वाले लोगों तथा मतदान की उम्र में पहुंचे नए आवेदकों में से 96.27 प्रतिशत लोग वैध मतदाता थे और उन्हें SIR के दौरान गलत तरीके से हटा दिया गया था।
दूसरे राज्यों के आंकड़ों से यह दर काफी अलग दिखाई देती है। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि अन्य राज्यों में Form 6 के जरिए नाम जोड़ने के आवेदनों की मंजूरी दर करीब 60 से 70 प्रतिशत रही है। वहीं पश्चिम बंगाल में इसी अवधि के दौरान यह दर लगभग 18.5 प्रतिशत रही।
SIR शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में करीब 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। अक्टूबर 2025 में SIR शुरू हुआ और 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। इसमें 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट होने के आधार पर हटा दिए गए थे।
ड्राफ्ट सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद बीजेपी के राज्य नेतृत्व की गतिविधियों का भी रिपोर्ट में जिक्र है। 6 जनवरी को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठक हुई थी, जिसमें बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले हर बूथ पर कम से कम 200 मतदाताओं के नाम जोड़ने को कहा गया था।
उत्तर प्रदेश के CEO नवदीप रिणवा के फरवरी के एक बयान का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। उन्होंने कहा था कि Form 6 के जरिए आवेदन करने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
नियमों के मुताबिक, Form 6 का प्रत्येक आवेदन संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के Electoral Registration Officer यानी ERO के पास चार साल तक सुरक्षित रखा जाता है। नाम जोड़ने के आवेदन का पहले बूथ लेवल अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाता है और उसके बाद ERO उसे मंजूरी देता है।
जाँच के दौरान 403 विधानसभा क्षेत्रों में सार्वजनिक किए गए 71.38 लाख Form 6 आवेदनों का विश्लेषण किया गया। इसमें 6 जनवरी 2026 से पहले दाखिल किए गए Form 6 आवेदन उपलब्ध नहीं मिले। 16.18 लाख आवेदनों के अस्तित्व की जानकारी उत्तर प्रदेश CEO के X अकाउंट पर जारी एक जानकारी से मिली, लेकिन इन आवेदनों का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
जाँच में यह सवाल भी उठाया गया कि SIR के ड्राफ्ट चरण में करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद उनमें से अधिकांश को अंतिम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत दोबारा शामिल किया गया।
उत्तर प्रदेश में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 13.39 करोड़ रह गई। ऐसे में 16.18 लाख मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं की तुलना में छोटी लग सकती है, लेकिन विधानसभा और बूथवार इनका वितरण चुनावी स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
जब 16.18 लाख मतदाताओं के बारे में उत्तर प्रदेश के CEO से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “हमारे डेटा में कोई मिसमैच नहीं है। मिसमैच आपकी व्याख्या में है।”
जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, CEO की प्रेस कॉन्फ्रेंस, उनके X अकाउंट और वेबसाइट पर 16.18 लाख जोड़े गए मतदाताओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 71.38 लाख Form 6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया गया और अंतिम सूची में 84.30 लाख मतदाता जोड़े गए, तो अतिरिक्त 12.92 लाख मतदाताओं का स्रोत क्या है और 16.18 लाख प्री-ड्राफ्ट आवेदनों का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
अनिल कुमार गॉड पिछले 12 वर्षों से हिंदी भाषी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. गॉड.की राजनीतिक, अपराध और सामाजिक खबरों पर अच्छी पकड़ है. विभिन्न संस्थानों में रहते हुए कई बार उनके काम का असर भी देखने को मिला. डिजिटल पत्रकारिता की तरफ रुख किया. वर्तमान मै TNI . अनिल कुमार गॉड ने CCS यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. घूमना, रिपोर्टिंग करना उनका शौंक है
