
यूपी का चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को कानूनी राहत मिली है। मामले की दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही राजा भैया के खिलाफ मामले में आगे कार्रवाई की मांग खारिज हो गई। सीबीआई की दोबारा जांच में भी उनके खिलाफ अभियोजन चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई थी।
19 सितंबर 2026 को आदेश में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतिभा सिंह ने सीबीआई की ओर से थाना हथिगवां, प्रतापगढ़ में दाखिल अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार किया। यह मामला सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराया गया था।
आदेश में अदालत ने अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री, क्लोजर रिपोर्ट, विशेषज्ञ राय और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कहा कि सीबीआई की ओर से की गई विवेचना से परवीन आजाद की ओर से दिए गए तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं मिलता।
सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले दाखिल सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। उन्होंने राजा भैया समेत अन्य नामजद लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में मामले की दोबारा जांच शुरू की थी। जांच में राजा भैया की भूमिका को भी दोबारा खंगाला गया।
इसके बाद सीबीआई ने दिसंबर 2023 में दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में राजा भैया को आरोपी नहीं बनाया गया और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई।
2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद बिगड़े हालात को संभालने पहुंचे सीओ जियाउल हक की भीड़ ने हत्या कर दी थी। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने राजा भैया और उनके कुछ करीबियों को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। बाद में अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। दोषी ठहराए गए आरोपियों में फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, राम लखन गौतम, छोटे लाल यादव, राम आसरे, मुन्ना पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पाल उर्फ बुल्ले पाल शामिल थे। एक आरोपी सुधीर यादव को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया था।
Report