
CEC द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के उद्देश्यों में ‘विदेशी अवैध प्रवासियों’ को हटाने की बात कहे जाने के एक साल बाद इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट बताती है कि इस प्रक्रिया में चिह्नित हुए ‘विदेशियों’ की संख्या कुल मतदाताओं के मुकाबले काफी कम पायी गई है.
याद हो कि सरकार के प्रतिनिधियों और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी कई बार इसी उद्देश्य का हवाला देते हुए विवादित एसआईआर का समर्थन किया है.
अब हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार हिमांशी दहिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छह राज्यों में, जहां कुल मतदाताओं की संख्या करीब 9.86 करोड़ है, केवल 1,600 लोगों के नाम ही विदेशी नागरिकों के रूप में चिह्नित किए गए हैं.
भाजपा एसआईआर को अपनी ‘पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो’ नीति के हिस्से के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती रही है. ठीक एक साल पहले, 2025 में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बिहार में एसआईआर के दौरान केवल ‘घुसपैठियों’ के नाम हटाए गए थे.
शाह ने कहा था, ‘अगर वे भारतीय नागरिक होते, तब वे इसका सबूत देते. आपको या मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है. हमसे जो भी मांगा जाएगा, हम अपने दस्तावेज पेश कर देंगे. जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनमें से केवल तीन अपीलें आई हैं. अगर कुछ गलत हुआ होता, तो क्या अपीलें नहीं की जातीं? इसका मतलब है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, वे भारतीय नागरिक थे ही नहीं. और उन्हीं के नाम हटाए गए हैं.’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक जिन लोगों को संदिग्ध विदेशी नागरिक के रूप में चिह्नित किया गया है, उनकी संख्या कुल मतदाताओं और इस प्रक्रिया के तहत हटाए गए नामों की तुलना में बेहद कम है.
उल्लेखनीय है कि एसआईआर के तहत अब तक 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं. इस प्रक्रिया के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. विपक्षी दल और युवा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स ने उन 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के कार्यालयों से संपर्क किया, जहां एसआईआर पूरा हो चुका था या मतदाता सूचियों का मसौदा प्रकाशित किया जा चुका था. इनमें से 11 राज्यों के अधिकारियों ने अखबार को जवाब दिया, लेकिन केवल छह राज्यों ने हिमांशी दहिया को संदिग्ध विदेशी नागरिकों की संख्या बताई.
खास बात यह है कि चार राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों ने कहा कि वे इस संबंध में आंकड़े अलग से नहीं रखते. इनमें ओडिशा भी शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमें मतदाता सूचियों में संदिग्ध विदेशी नागरिक मिले थे, लेकिन हमने उनकी संख्या का कोई आंकड़ा नहीं रखा.’
रिपोर्ट में चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि ‘राज्यों से यह आंकड़ा अलग से जुटाने के लिए नहीं कहा गया था.’
अधिकारी ने आगे कहा, ‘हमारे पास इस संबंध में संयुक्त या राज्यवार आंकड़े भी नहीं हैं. अगर ऐसे मामले सामने आए तब उन्हें एएसडीडीओ में ‘अन्य’ श्रेणी के तहत रखा गया. लेकिन चुनाव आयोग ने उनसे इन मामलों का ब्योरा देने के लिए नहीं कहा.’
कर्नाटक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने बताया कि 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई थी जिनके नाम हटाने थे. इनमें बेंगलुरु उत्तर के 545 नेपाली नागरिक शामिल हैं.
राज्य में एसआईआर से पहले मतदाता सूची में पहले 5.54 करोड़ नाम थे. लेकिन अब राज्य की मतदाता सूची में करीब 99.77 लाख नाम कम हो गए हैं.
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने कहा कि उनके कार्यालय ने ‘विदेशियों की पहचान की है’ और ‘उनकी संख्या निश्चित रूप से 1,000 से कम है.’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में उन राज्यों के आंकड़े भी दिए गए हैं, जहां ‘विदेशी नागरिक’ के रिकॉर्ड दर्ज किए गए.
उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच इसी महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर एसआईआर के बहाने ‘घुसपैठियों’ को बचाने का आरोप लगाया था.
हालांकि, गृह मंत्रालय ने खुद एक आरटीआई के जवाब में स्वीकार किया था कि उसके पास देशभर में पहचाने गए, गिरफ़्तार किए गए और निर्वासित किए गए ‘घुसपैठियों’ का केंद्रीय स्तर पर आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
अनिल कुमार गॉड पिछले 15 वर्षों से हिंदी भाषी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. गॉड.की राजनीतिक, अपराध और सामाजिक खबरों पर अच्छी पकड़ है. विभिन्न संस्थानों में रहते हुए कई बार उनके काम का असर भी देखने को मिला. डिजिटल पत्रकारिता की तरफ रुख किया. वर्तमान मै TNI . अनिल कुमार गॉड ने CCS यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. घूमना, रिपोर्टिंग करना उनका शौंक है
