
इंफाल। मणिपुर में एक बार फिर हिंसा का मामला सामने आया है। कांगपोकपी जिले से 3 दिन से लापता दो युवकों के शव रविवार को पड़ोसी सेनापति जिले में बरामद हुए हैं। दोनों युवक कुकी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस के अनुसार दोनों के शव केले के खेत से बोरियों में बंद मिले।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान 21 वर्षीय टी. चोंग्लोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हैंगशिंग के रूप में हुई है। दोनों 29 अक्टूबर को कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव से लापता हुए थे। उनकी तलाश में पुलिस, सीआरपीएफ, असम राइफल्स और RAF की संयुक्त टीम ने कांगपोकपी-सेनापति सीमा पर तलाशी अभियान चलाया था। रविवार को एनएच-2 के पास सर्च ऑपरेशन के दौरान उनके शव मिले।
शव मिलते ही कांगपोकपी में तनाव
शव मिलने की खबर फैलते ही कांगपोकपी जिला मुख्यालय में तनाव फैल गया। बड़ी संख्या में लोग एसपी कार्यालय के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने हत्या के विरोध में नारेबाजी की। पुलिस के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस झड़प में कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है।प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने घटना की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्थानीय संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। संगठन ने कहा है कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं
होते, तब तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि मणिपुर में पिछले ढाई साल से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस साल फरवरी से कुकी और नगा समुदाय के बीच भी कुछ जिलों में संघर्ष की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें कई लोगों की जान गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच की जा रही है।
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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा! 3 दिन से लापता कुकी समुदाय के तीन युवकों के क्षत-विक्षत शव मिले, प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प; आंसू गैस छोड़ी, सरकार के खिलाफ नारेबाजी, 3 साल से जल रहा है प्रदेश, 300 से ज़्यादा हुई मौतें, लाखों लोग हुए बेघर, हिंसा रोकने में नाकाम नहीं रही मोदी सरकार!
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मणिपुर में तीन दिन से लापता दो युवकों के क्षत-विक्षत शव रविवार को बरामद किए गए। दोनों युवक कुकी समुदाय से थे और 29 अक्तूबर को कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव से लापता हुए थे। पुलिस के मुताबिक, उनके शव पड़ोसी सेनापति जिले के पहाड़ी इलाके में केले के एक खेत से मिले। दोनों के शव बोरियों में बंद थे।
मृतकों की पहचान 21 वर्षीय टी. चोंग्लोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हैंगशिंग के रूप में हुई है। शव मिलने की खबर फैलते ही कांगपोकपी जिला मुख्यालय में तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दोनों युवकों का अपहरण कर नगा उग्रवादियों ने उनकी हत्या की है।
दोनों युवकों की हत्या के विरोध में बड़ी संख्या में लोग कांगपोकपी स्थित पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के बाहर जमा हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कुछ लोग घायल हुए हैं।
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने दोनों युवकों की हत्या की निंदा की। उन्होंने बयान में कहा, “जो शुरुआत में उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद थी, उसका अंत दुखद घटना के रूप में हुआ।” उन्होंने मांग की कि इस गंभीर अपराध की पूरी जांच हो और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।
वहीं, कांगपोकपी स्थित कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने घटना को लेकर दूसरे उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो के इस्तीफे की मांग की है। दिखो नगा समुदाय से आते हैं। समिति ने ताफू कुकी गांव को सेनापति एसपी के अधिकार क्षेत्र से हटाकर कांगपोकपी एसपी के अधीन करने की भी मांग की है। COTU ने कहा कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक दोनों युवकों के शव अंतिम संस्कार के लिए गांव नहीं ले जाए जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों युवकों की तलाश में पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने कांगपोकपी और सेनापति जिलों की सीमा के आसपास अभियान चलाया था। रविवार को मणिपुर पुलिस, कोबरा, सीआरपीएफ, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमों ने एनएच-2 के पूर्व में एसपी रोड के आसपास तलाशी अभियान चलाया। इसी अभियान के दौरान दोनों युवकों के शव बरामद हुए। पुलिस ने बताया कि मामले में जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मणिपुर में हिंसा की एक और घटना शनिवार को सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, नॉनी जिले में प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी में कुकी समुदाय के तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस साल फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से तामेंगलॉन्ग, नॉनी, कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस दौरान कई घरों को भी आग के हवाले किया गया।
