
गाजियाबाद के दिल में बसने वाले समाजसेवी अशोक शर्मा: सेवा ही जिनका संकल्प है
अगर निस्वार्थ सेवा, सादगी और जनसेवा की मिसाल देखनी है तो वह नाम है समाजसेवी अशोक शर्मा। बिना किसी पद और स्वार्थ के, वर्षों से समाज के हर वर्ग के लिए काम करना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन चुका है
सेवा का कोई मौसम नहीं होता अशोक शर्मा जी का मानना है कि समाज सेवा का कोई मुहूर्त नहीं होता। चाहे कड़कड़ाती ठंड में कंबल वितरण हो, गर्मी में प्याऊ लगवाना हो, रक्तदान शिविर हो या किसी गरीब बेटी की शादी में मदद — वे हमेशा सबसे आगे खड़े मिलते हैं। कोरोना काल में जब लोग घरों में बंद थे, तब अशोक शर्मा जी ने गली-गली जाकर जरूरतमंद परिवारों तक राशन और दवाइयां पहुंचाईं।
हर त्योहार पर जनता के साथ
दीपावली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा और छठ जैसे पावन पर्वों पर वे सिर्फ शुभकामनाएं नहीं देते, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के बीच जाकर खुशियां बांटते हैं। इस बार भी उन्होंने कहा
“मेरा गाजियाबाद मेरा परिवार है। मेरे परिवार के हर सदस्य के घर में दीपावली की रोशनी और छठी मैया का आशीर्वाद बना रहे, यही मेरी सच्ची कामना है। इस बार दीया मिट्टी का जलाएं, खुशी सबके साथ बांटें।”
लोगों की जुबान पर एक ही नाम
क्षेत्र के बुजुर्ग रामपाल जी कहते हैं, “अशोक शर्मा जी को फोन करो तो आधी रात को भी हाजिर हो जाते हैं। ऐसे समाजसेवी बहुत कम मिलते हैं।”युवाओं के लिए भी वे प्रेरणा हैं। वे हमेशा युवाओं को नशे से दूर रहकर शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।अंत में एक ही संदेश
अशोक शर्मा जी ने सभी क्षेत्रवासियों से अपील की है कि दीपावली पर पटाखों से नहीं, दीयों से रोशनी करें, पर्यावरण का ध्यान रखें और गोवर्धन पूजा पर गौ-सेवा का संकल्प लें।निश्चित रूप से, अशोक शर्मा जैसे समाजसेवी ही समाज की असली पूंजी हैं।संपर्क / उद्धरण:
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