
TNIगाजियाबाद। प्रकाश के महापर्व दीपावली, धन-वैभव के प्रतीक धनतेरस, गौ-संरक्षण एवं प्रकृति प्रेम के पर्व गोवर्धन पूजा तथा लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर युवा समाजसेवी वाशु बुंदेला ने समस्त क्षेत्रवासियों, प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।अपने शुभकामना संदेश में वाशु बुंदेला ने कहा —
दीपावली का पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी बांटने में है। मैं कामना करता हूं कि इस दीपावली पर किसी भी घर में अंधेरा न रहे, हर घर में खुशहाली का दीया जले। धनतेरस पर मां लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे। गोवर्धन पूजा हमें गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है और छठ महापर्व सूर्यदेव की उपासना का पर्व है जो हमें संयम और शुद्धता सिखाता है।
सेवा ही संकल्प है
वाशु बुंदेला अपने मिलनसार स्वभाव और निस्वार्थ समाज सेवा के लिए युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। बिना किसी पद और स्वार्थ के वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहते हैं। चाहे रक्तदान शिविर हो, गरीब परिवारों की मदद हो या सामाजिक जागरूकता अभियान — वाशु बुंदेला हमेशा सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वाशु बुंदेला जैसे युवा समाजसेवी ही समाज की असली ताकत हैं।
आप सभी को दीपावली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा एवं छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार आपके जीवन में नई रोशनी, सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।
— समाजसेवी वाशु बुंदेला
- मानव सेवा ही ईश्वर सेवा: भारतीय संस्कृति में हमेशा से माना गया है कि पीड़ित और जरूरतमंद इंसानों की सेवा करना ही सबसे बड़ी भक्ति और ईश्वर की सेवा है।
- निस्वार्थ भाव: सच्चा समाजसेवी वह है जो मान-अपमान, लाभ-हानि या प्रसिद्धि की परवाह किए बिना अपना तन, मन और धन समाज के उत्थान में लगा देता है।
- सामाजिक समानता और एकता: समाज सेवा से समाज में फैली असमानता, गरीबी, अंधविश्वास, कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने में मदद मिलती है।
- आत्मसंतोष: प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. प्रकाश आमटे के अनुसार, सेवा उपकार की भावना से नहीं बल्कि आत्मसंतोष और कर्तव्य की भावना से की जानी चाहिए ताकि विनम्रता बनी रहे।
समाजसेवी वाशु बुंदेला
